Satya Pal Malik Death News: पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, लंबे समय से थे बीमार, RML अस्पताल में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025:
भारत के राजनीतिक जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। देश के वरिष्ठ और स्पष्टवक्ता नेता सत्यपाल मलिक का आज सुबह दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में निधन हो गया। 78 वर्षीय मलिक पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे और उन्हें हाल ही में तबीयत बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर फैल गई है।

सत्यपाल मलिक का जीवन परिचय

सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1947 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से थे, लेकिन शिक्षा और संघर्ष के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में एक खास स्थान बनाया।

उन्होंने मेरठ कॉलेज से स्नातक और फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने छात्र राजनीति से की थी और फिर धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बने।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक करियर बेहद विविध और दिलचस्प रहा। उन्होंने अपने जीवन में कई राजनीतिक दलों के साथ काम किया:

राजनीतिक दलभूमिका
भारतीय क्रांति दलप्रारंभिक सदस्य
कांग्रेस पार्टीलोकसभा सांसद
समाजवादी पार्टीप्रमुख नेता
भारतीय जनता पार्टी (BJP)वरिष्ठ सदस्य और राज्यपाल पद पर नियुक्त

उन्होंने 1989 में अलीगढ़ से लोकसभा चुनाव जीता और उसके बाद वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। सत्यपाल मलिक उन चंद नेताओं में से थे जिन्होंने सत्ता और विपक्ष दोनों के साथ काम किया।

राज्यपाल के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं

सत्यपाल मलिक का नाम भारत के सबसे सक्रिय और विवादों से घिरे राज्यपालों में शुमार किया जाता है। वे चार अलग-अलग राज्यों के राज्यपाल रहे:

राज्यकार्यकाल
बिहार2017 – 2018
जम्मू-कश्मीर2018 – 2019
गोवा2019 – 2020
मेघालय2020 – 2022

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल सबसे अधिक चर्चा में रहा। उनके कार्यकाल में ही 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को हटाया गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। इस ऐतिहासिक निर्णय में सत्यपाल मलिक की भूमिका निर्णायक रही।

किसान आंदोलन और साहसी बयान

सत्यपाल मलिक ने हमेशा जनता और किसानों के हित में बोलने से परहेज नहीं किया। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना की और किसानों के समर्थन में कई बार बयान दिए।

उनकी यह बेबाकी उन्हें सरकार की नजरों में असुविधाजनक बना देती थी, लेकिन उन्होंने कभी अपनी आवाज दबने नहीं दी। उन्होंने बार-बार कहा कि “अगर नेता जनता के हक में नहीं बोल सकता, तो उसकी राजनीति व्यर्थ है।”

निधन पर राजनेताओं की श्रद्धांजलि

उनके निधन की खबर फैलते ही देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया और उन्हें एक “जनप्रिय नेता” बताया।
  • राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, और शरद पवार सहित अनेक नेताओं ने मलिक को निडर और सच्चा जनसेवक बताया।
  • पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उनके निधन को राष्ट्र की क्षति करार दिया।

अंतिम संस्कार की तैयारियां

सत्यपाल मलिक का अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश के बागपत जिले स्थित उनके पैतृक गांव हिसावदा में किया जाएगा। इससे पहले, उनका पार्थिव शरीर दिल्ली स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

परिवार की ओर से जानकारी दी गई है कि सरकारी सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, और हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे।

सत्यपाल मलिक की विरासत

  • सत्यपाल मलिक की पहचान एक निर्भीक, निष्पक्ष और जनहितैषी नेता के रूप में रही।
  • उन्होंने सत्ता में रहते हुए भी गलत नीतियों का विरोध करने का साहस दिखाया।
  • उनकी सोच हमेशा समाज के कमजोर वर्गों, किसानों और छात्रों के हितों पर केंद्रित रही।

उनके कई बयान समय-समय पर सुर्खियों में रहे, लेकिन उनका मकसद हमेशा सच को सामने लाना और सत्ता से सवाल पूछना रहा।

निष्कर्ष

सत्यपाल मलिक का निधन भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे उन गिने-चुने नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सत्ता में रहते हुए भी सच बोलने का साहस दिखाया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि राजनीति केवल पद और सत्ता के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा और नैतिकता के लिए भी हो सकती है

उनकी यादें, उनके विचार और उनका साहसी व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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