नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025:
देश के वरिष्ठ राजनेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का सोमवार को दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में निधन हो गया। 78 वर्षीय सत्यपाल मलिक पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और उन्हें हाल ही में स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने सोमवार सुबह अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर है।
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर
सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1947 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा मेरठ कॉलेज और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पूरी की। वे राजनीति में एक सक्रिय और मुखर नेता के रूप में जाने जाते थे। मलिक ने विभिन्न दलों में काम किया और अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
विभिन्न राज्यों के राज्यपाल रहे
सत्यपाल मलिक को उनके स्पष्टवक्ता रवैये और निर्भीक टिप्पणियों के लिए जाना जाता था। वे कई राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं:
राज्य | कार्यकाल |
---|---|
बिहार | अक्टूबर 2017 – अगस्त 2018 |
जम्मू-कश्मीर | अगस्त 2018 – अक्टूबर 2019 |
गोवा | अक्टूबर 2019 – अगस्त 2020 |
मेघालय | अगस्त 2020 – अक्टूबर 2022 |
जम्मू-कश्मीर में उनके कार्यकाल के दौरान ही राज्य का विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) हटाया गया था और इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। यह भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी और सत्यपाल मलिक ने उस दौरान राज्यपाल के तौर पर अहम भूमिका निभाई थी।
किसान आंदोलन पर बेबाक राय
राजनीति में रहते हुए सत्यपाल मलिक ने अक्सर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, विशेषकर किसान आंदोलन के दौरान। उन्होंने खुलकर किसानों का समर्थन किया और सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की थी। इसी वजह से वे कई बार सत्तारूढ़ पार्टी की नाराजगी का भी शिकार हुए, लेकिन उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया।
राजनीतिक दलों से संबंध
सत्यपाल मलिक ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय क्रांति दल से की थी, बाद में लोकदल, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अंत में भारतीय जनता पार्टी से भी जुड़े। वे एक समय राज्यसभा सदस्य और लोकसभा सांसद भी रहे।
उनका राजनीतिक सफर इस बात का प्रमाण है कि वे विचारधारा से अधिक जनहित और सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान देने वाले नेता थे।
निधन पर देशभर में शोक
सत्यपाल मलिक के निधन की खबर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं ने शोक व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा,
“सत्यपाल मलिक जी का सार्वजनिक जीवन जनसेवा को समर्पित रहा। उन्होंने कई राज्यों में जिम्मेदारी के साथ प्रशासनिक दायित्व निभाए। उनके निधन से दुखी हूं। ईश्वर उन्हें शांति दें।”
अंतिम संस्कार की तैयारियां
परिवार के अनुसार, सत्यपाल मलिक का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव हिसावदा, बागपत (उत्तर प्रदेश) में किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए पहले उनके दिल्ली आवास पर लाया जाएगा, फिर बागपत ले जाया जाएगा।
सत्यपाल मलिक की विरासत
सत्यपाल मलिक एक ऐसे नेता थे जो सत्ता में रहते हुए भी जनता के पक्ष में बोलने का साहस रखते थे। उन्होंने कभी भी अपनी बात कहने में हिचक नहीं दिखाई। उनका निधन भारत की राजनीति में एक साहसी और निडर आवाज का अंत है।
निष्कर्ष
सत्यपाल मलिक का जीवन सार्वजनिक सेवा, ईमानदारी और बेबाकी की मिसाल रहा है। उन्होंने न केवल राज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि कई ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय रखकर लोकतंत्र को मजबूत किया। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो उनके विचार और उनके सिद्धांत हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।