रूस में 600 साल बाद फटा क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी: 6 किलोमीटर तक फैला राख का गुबार, खतरे में कई इलाके

रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र कामचटका प्रायद्वीप में स्थित क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी ने लगभग 600 साल बाद एक बार फिर से भीषण विस्फोट किया है। इस विस्फोट के कारण वातावरण में 6 किलोमीटर तक राख का गुबार फैल गया, जिससे स्थानीय आबादी और विमान यातायात को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

यह ज्वालामुखी इस क्षेत्र का सबसे कम सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक माना जाता था, लेकिन 2025 में इसके अचानक सक्रिय हो जाने से पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिक गई हैं। इससे पहले, इसी इलाके में दुनिया का छठा सबसे बड़ा भूकंप भी आ चुका है, जिससे यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है।

मुख्य जानकारी एक नजर में

बिंदुविवरण
स्थानकामचटका प्रायद्वीप, रूस
ज्वालामुखी का नामक्रशेनिनिकोव
अंतिम विस्फोटलगभग 600 साल पहले
वर्तमान विस्फोट की तिथिअगस्त 2025
राख की ऊंचाईलगभग 6 किलोमीटर
खतरे की स्थितिरेड अलर्ट
प्रभावित क्षेत्र100 किमी तक का क्षेत्र
पास के शहरपेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की, एसेन
भूकंप इतिहास9.0 तीव्रता का भूकंप (पिछले दशक में)

क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी: भूगोल और इतिहास

क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी रूस के कामचटका क्षेत्र में स्थित है, जो कि पृथ्वी के सबसे सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्रों में से एक है। यह दो शंकुधारी चट्टानों से बना एक समग्र ज्वालामुखी है, जो पहले कभी भी इस पैमाने पर सक्रिय नहीं हुआ था।

इतिहासकारों और ज्वालामुखी वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका पिछला प्रमुख विस्फोट 1400 के दशक के मध्य में हुआ था। तब से इसे निष्क्रिय माना जाता रहा, लेकिन 2025 के अगस्त में इसका सक्रिय हो जाना वैज्ञानिकों और स्थानीय प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बन गया।

कैसे हुआ यह विस्फोट?

रूसी ज्वालामुखी निगरानी केंद्र (KVERT) के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से क्रशेनिनिकोव के नीचे असामान्य भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जा रही थीं। जमीनी कंपन और तापमान में बदलाव से संकेत मिल रहे थे कि मैग्मा सतह के करीब आ रहा है।

अंततः, 2 अगस्त 2025 को सुबह के समय जोरदार धमाके के साथ क्रशेनिनिकोव फट पड़ा। विस्फोट इतना तेज था कि 100 किलोमीटर दूर तक इसकी ध्वनि सुनी गई और राख का गुबार 6 किलोमीटर की ऊंचाई तक छा गया।

राख का गुबार और उसका प्रभाव

यह राख का गुबार सिर्फ देखने में ही भयानक नहीं था, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव भी पड़ा:

1. वायु यातायात बाधित

  • कम दृश्यता के कारण 20 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं।
  • पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की एयरपोर्ट को कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया।

2. स्वास्थ्य पर खतरा

  • हवा में घुली राख के कणों से श्वसन तंत्र पर असर पड़ा।
  • डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने, बाहर न निकलने और साफ पानी पीने की सलाह दी।

3. कृषि पर असर

  • आसपास के गांवों में फसलें राख से ढंक गईं, जिससे आगामी महीनों में भोजन संकट की आशंका है।

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

कामचटका प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया और रेड ज़ोन से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया। राहत कार्यों में हेलीकॉप्टर, सैन्य बल और आपदा प्रबंधन टीमें लगाई गईं।

जारी हुईं सावधानियां:

  • 50 किमी के दायरे में आम लोगों का प्रवेश वर्जित।
  • नदी और झीलों के जल में राख मिल जाने से पानी पीने पर रोक।
  • स्कूल और बाजार अस्थायी रूप से बंद।

दुनिया का छठा सबसे बड़ा भूकंप भी यहीं आया था

यह क्षेत्र न केवल ज्वालामुखी के लिए प्रसिद्ध है बल्कि भूकंपीय गतिविधियों का केंद्र भी रहा है। कामचटका क्षेत्र में कुछ दशक पहले 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जो वैश्विक स्तर पर छठा सबसे बड़ा भूकंप माना गया था।

उस भूकंप ने समुद्र तटों को तबाह कर दिया था और कई इलाकों में सुनामी की लहरें भी पहुंची थीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्वालामुखी गतिविधि और भूकंपीय हलचल एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों की चेतावनी और विश्लेषण

क्रशेनिनिकोव के विस्फोट ने वैज्ञानिक समुदाय को सतर्क कर दिया है। भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि:

  • यह सिर्फ प्रारंभिक विस्फोट हो सकता है।
  • आने वाले हफ्तों में और विस्फोट या लावा प्रवाह हो सकता है।
  • पास के अन्य ज्वालामुखियों में भी सक्रियता बढ़ने की संभावना है।

रूसी विज्ञान अकादमी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इवान कोलोव ने कहा,
“यह विस्फोट हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी के अंदर की ऊर्जा हमेशा गतिशील रहती है। हमें अभी और सतर्क रहने की जरूरत है।”

दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं

इस ज्वालामुखी विस्फोट की खबर फैलते ही कई देशों ने रूस को सहायता और निगरानी उपकरण भेजने की पेशकश की। जापान, अमेरिका, और जर्मनी के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने डेटा साझा करने और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी प्रणाली को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की है।

संयुक्त राष्ट्र की आपदा प्रबंधन इकाई ने कहा है कि अगर विस्फोट की तीव्रता बढ़ी, तो यह वैश्विक मौसम और हवाई यातायात को भी प्रभावित कर सकता है।

क्या यह जलवायु पर असर डालेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ज्वालामुखी लम्बे समय तक सक्रिय रहा, तो इससे वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य गैसें फैलेंगी, जिससे:

  • सूर्य की किरणों का अवरोध हो सकता है।
  • तापमान में अस्थायी गिरावट देखी जा सकती है।
  • एसिड रेन जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

पूर्व में, माउंट पिनातुबो (1991, फिलीपींस) के विस्फोट से ऐसा ही प्रभाव पड़ा था, जब वैश्विक तापमान में लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई थी।

स्थानीय लोगों की ज़ुबानी

पेट्रोपावलोव्स्क के निवासी एलेक्जेंडर पेत्रोव कहते हैं,
“हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा। आसमान पूरी तरह से काला हो गया था। राख हर जगह फैल गई थी – घर, गाड़ियां, फसलें। डर लग रहा है कि यह आगे और खराब हो सकता है।”

क्या आगे और खतरा है?

फिलहाल, वैज्ञानिक यह भविष्यवाणी नहीं कर पा रहे हैं कि यह विस्फोट आगे किस दिशा में बढ़ेगा। लेकिन कुछ संभावनाएं हैं:

  • लावा प्रवाह: आसपास के जंगल और गांव प्रभावित हो सकते हैं।
  • भूकंप: मैग्मा मूवमेंट के कारण आसपास की प्लेट्स हिल सकती हैं।
  • सुनामी का खतरा: यदि विस्फोट समुद्र के अंदर हुआ।

निष्कर्ष: प्रकृति की ताकत का अहसास

क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी का यह विस्फोट यह दिखाता है कि इंसान भले ही चांद और मंगल तक पहुंच गया हो, लेकिन पृथ्वी की प्राकृतिक शक्तियों के सामने अब भी असहाय है। वैज्ञानिकों की चेतावनी और प्रशासन की तत्परता इस संकट से निपटने में मदद कर सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाना ही होगा।

यह घटना न केवल रूस बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि जलवायु, पर्यावरण और भूगर्भीय संरचनाओं की निगरानी और सतर्कता अनिवार्य है।

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