ऑपरेशन महादेव: कश्मीर में आतंकियों का “तीसरा नेत्र” खुला, पहलगाम के मास्टरमाइंड समेत तीन आतंकी ढेर

ऑपरेशन महादेव: कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई

जम्मू‑कश्मीर के कश्मीर वादी में सुरक्षा बलों द्वारा संचालित ऑपरेशन महादेव ने आतंक के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। इस अभियान में पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड समेत तीन आतंकियों की हुई निश्चत कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी, हौसला और समर्पण को दर्शाया है।

ऑपरेशन की पृष्ठभूमि और संदर्भ

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में कई आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान गंवाई गई थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को गुप्त सूत्रों से आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी मिली।

लगभग 96 दिनों तक आतंकियों की लोकेशन सटीक रूप से पता लगाने का काम चला। मोबाइल ट्रैकिंग, मानव स्रोतों, इलाके की निगरानी और स्थानीय सुरक्षाबलों की मदद से इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान हुई। इस पहचान के बाद ऑपरेशन महादेव को उचित समय पर अंजाम दिया गया।

अभियान की रूपरेखा और कार्यवाही

ऑपरेशन की शुरुआत 28 जुलाई 2025 को सुबह नौ बजे हुई। सेना, CRPF और जम्मू‑कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने दाचीगाम जंगल में स्थित एक शिविर पर अचानक कार्रवाई शुरू की। इस शिविर में तीन आतंकवादी स्थित थे। छह घंटे तक चली फायरिंग और रणनीतिक घेराबंदी के बाद तीनों आतंकियों को जगह पर निष्क्रिय कर दिया गया।

प्राथमिक आतंकियों की पहचान

सुरक्षा बलों की रिपोर्ट अनुसार मारे गए आतंकियों में शामिल थे:

  • सुलेमान शाह (हाशिम मूसा) – यह पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था और लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य माना जाता था।
  • अबु हमजा और यासिर – दोनों आतंकी पहलगाम हमले में शामिल थे और भारत में गहरी जड़ें फैलाने का प्रयास कर रहे थे।

इन दोनों की निष्क्रियता से स्पष्ट हुआ कि आतंकी नेटवर्क भारत में मजबूती से पैर फैलाना चाहता था।

हथियार और सबूत की बरामदगी

तलाशी में बरामद सामग्री में शामिल थे:

  1. AK-47 और M4 कार्बाइन राइफल
  2. राइफल ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री
  3. सैटेलाइट फोन, जिसमें आतंकी कम्युनिकेशन और योजनाओं का पूरा ट्रेस था

ये तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि आतंकवादी गुप्त रूप से बड़ी संख्या में हथियार और विस्फोटक लेकर सक्रिय थे।

अभियान का सांकेतिक महत्व

ऑपरेशन महादेव का नाम धार्मिक प्रतीकों पर आधारित प्रतीत होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान शिव का तीसरा नेत्र अधर्म को विनाश करता है। इसी प्रतीक के अनुरूप यह ऑपरेशन सावन के तीसरे सोमवार को किया गया, जिससे संदेश मिला कि भारत सुरक्षा के मामले में किसी विषमता को बर्दाश्त नहीं करेगा।

प्रतिक्रिया और व्यापक प्रभाव

ऑपरेशन महादेव की सफलता को जम्मू‑कश्मीर सरकार और स्थानीय नेतृत्व ने सराहा। राज्य सरकार ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ शांति के प्रयासों को और मजबूत करेगी।

समान रूप से राष्ट्रीय स्तर पर भी इस अभियान को सुरक्षा संरचना की सामर्थ्य और आतंकवाद निवारण की रणनीतिक दृष्टिकोण की पुष्टि के रूप में देखा गया।

परिणामों का रणनीतिक विश्लेषण

ऑपरेशन महादेव की प्रमुख सफलताएं निम्नलिखित हैं:

  • दुर्लभ आतंकवादी नेटवर्क की छांव में आ रहे आतंकियों का सफाया
  • मास्टरमाइंड की निष्क्रियता से आतंकवादी गतिविधियों की नींव कमजोर हुई
  • सुरक्षा सुरक्षा महकमे की रणनीति, तालमेल और लंबे समय तक निरंतरता का प्रदर्शन हुआ

सारांश और भविष्य की दिशा

ऑपरेशन महादेव ने यह साबित किया कि सुरक्षा संस्थाएँ राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सतर्क और समर्पित हैं। इस कार्रवाई से केवल आतंकियों की निष्क्रियता ही नहीं हुई, बल्कि यह संदेश गया कि भारत अपनी अखंडता और आम नागरिकों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा।

भविष्य में ऐसी सफलताएं यह बताती हैं कि आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए सतत निगरानी, त्वरित कार्रवाई और उच्च स्तरीय समन्वय आवश्यक है। ऑपरेशन महादेव में यही सब कुछ देखने को मिला।

संक्षेप में, यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सुरक्षा ताकत की दृढ़ता और कार्यदक्षता का एक मानक उदाहरण है।

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