इस्तीफ़े के मुख्य तथ्य
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अपने पद से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर यह जानकारी दी और कहा कि अब उन्हें अपने स्वास्थ्य की देखभाल और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना आवश्यक है।
यह पहली बार है जब किसी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कार्यकाल के मध्य में इस्तीफा दिया है। इससे पहले उपराष्ट्रपति वी.वी. गिरी, भैरों सिंह शेखावत और कृष्णकांत का कार्यकाल भी अधूरा रह गया था, लेकिन वे विशेष परिस्थितियों में पद से हटे थे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और संभावित विवाद
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हाल ही में राज्यसभा में उन्होंने विपक्ष द्वारा लाए गए न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार किया था, जिससे सरकार और सत्ता पक्ष नाराज दिखाई दिया। माना जा रहा है कि यह निर्णय उनके इस्तीफे की प्रमुख वजह बना।
हालांकि, उनके द्वारा दिए गए पत्र में स्वास्थ्य कारणों को ही आधिकारिक कारण बताया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे एक रणनीतिक विदाई कहा जा रहा है।

विपक्षी प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, ने इसे एक “संवैधानिक छलावे के रूप में राजनीतिक विदाई” बताया है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सरकार पर न्यायपालिका में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरे की घंटी है।
राजस्थान के नेता सचिन पायलट ने इसे “कुछ गड़बड़” करार दिया और कहा कि इस्तीफा जितनी जल्दी हुआ, उतनी ही गहराई से इसकी पड़ताल की जानी चाहिए।
गठबंधन दलों ने भी मांग की है कि सरकार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की असली वजह स्पष्ट करनी चाहिए।

संभावित प्रभाव
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा राजस्थान की राजनीति में विशेष प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि वे जाट समुदाय के प्रमुख नेता माने जाते थे। उनके इस्तीफे से राज्य में इस समुदाय में असंतोष फैलने की संभावना है, जो आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है।
राज्यसभा में उनके सम्मान में विदाई भाषण या कार्यक्रम की कोई औपचारिक योजना अब तक सामने नहीं आई है। विपक्ष ने उनके लिए एक विदाई रात्रिभोज की बात कही, लेकिन उनके द्वारा उसमें भाग लेने की संभावना कम मानी जा रही है।
संक्षिप्त जीवनी
- जन्म: 18 मई 1951, राजस्थान
- पेशे: वकील, राजनीतिज्ञ
- पूर्व पद: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल (2019–2022)
- उपलब्धियाँ: सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता; सलमान खान से जुड़े काले हिरण मामले में उन्हें जमानत दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
- उपराष्ट्रपति का कार्यकाल: 11 अगस्त 2022 से 21 जुलाई 2025

सारांश:
पहलू | विवरण |
---|---|
इस्तीफ़ा तिथि | 21 जुलाई 2025 |
आधिकारिक कारण | स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और चिकित्सकीय सलाह |
विवाद | राज्यसभा में विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार करना |
राजनीतिक असर | जाट समुदाय में नाराज़गी, विपक्ष में हलचल, नए उपराष्ट्रपति की खोज शुरू |
विपक्षी आरोप | “संवैधानिक ढाल के पीछे राजनीतिक दबाव” |
क्षेत्रीय प्रभाव | राजस्थान की राजनीति पर प्रभाव संभावित |